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श्री विष्णु पुराण
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अंश 6: षष्ठ अंश
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अध्याय 4: प्राकृत प्रलयका वर्णन
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श्लोक 25
श्लोक
6.4.25
अरूपरसमस्पर्शमगन्धं न च मूर्त्तिमत्।
सर्वमापूरयच्चैव सुमहत्तत्प्रकाशते॥ २५॥
अनुवाद
उस समय रूप, रस, स्पर्श, गंध और आकार से रहित विशाल आकाश ही प्रकट होता है और सब कुछ प्रकाशित करता है ॥25॥
At that time, only the vast sky, devoid of form, taste, touch, smell and shape, appears and illuminates everything. ॥25॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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