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श्री विष्णु पुराण
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अंश 6: षष्ठ अंश
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अध्याय 4: प्राकृत प्रलयका वर्णन
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श्लोक 24
श्लोक
6.4.24
वायोरपि गुणं स्पर्शमाकाशो ग्रसते तत:।
प्रशाम्यति ततो वायु: खं तु तिष्ठत्यनावृतम्॥ २४॥
अनुवाद
तत्पश्चात् आकाश वायु का स्पर्श ग्रहण कर लेता है; तब वायु शान्त हो जाती है और आकाश आच्छादित हो जाता है ॥24॥
Thereafter the sky absorbs the touch of the air; then the air becomes calm and the sky becomes coverless. ॥ 24॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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