श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  6.3.9 
नाडिकाभ्यामथ द्वाभ्यां मुहूर्तो द्विजसत्तम।
अहोरात्रं मुहूर्तास्तु त्रिंशन्मासो दिनैस्तथा॥ ९॥
 
 
अनुवाद
हे दोनों भाइयों में श्रेष्ठ! ऐसी दो नाड़िकाओं से एक मुहूर्त, तीस मुहूर्तों से एक दिन-रात और उतने ही दिन-रातों से एक मास बनता है॥9॥
 
O best of the two brothers! Two such Naadikas make one Muhurta, thirty Muhurtas make one day and night and the same number of days and nights make one month.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)