vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 6: षष्ठ अंश
»
अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन
»
श्लोक 5
श्लोक
6.3.5
परार्द्धद्विगुणं यत्तु प्राकृतस्स लयो द्विज।
तदाव्यक्तेऽखिलं व्यक्तं स्वहेतौ लयमेति वै॥ ५॥
अनुवाद
हे इस अंतिम आधे भाग से भी दुगुना बड़ा, एक स्वाभाविक प्रलय होता है, उस समय यह सम्पूर्ण जगत् अपने कारण अव्यक्त में लीन हो जाता है ॥5॥
O twice as large as this last half, there is a natural dissolution, at that time this entire universe merges with its cause, the unmanifest. ॥ 5॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×