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vishnu 6.3.37: वे विशाल मेघ घोर शब्द करते हुए सम्पूर्ण आकाश को ढक लेते हैं और मूसलाधार वर्षा करके तीनों लोकों में फैली हुई भयंकर अग्नि को बुझा देते हैं ॥37॥   |   vishnu अध्याय 6.3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन   ।   vishnu अंश 6: षष्ठ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.3.37 
महारावा महाकाया: पूरयन्ति नभ:स्थलम्।
वर्षन्तस्ते महासारांस्तमग्निमतिभैरवम्।
शमयन्त्यखिलं विप्र त्रैलोक्यान्तरधिष्ठितम्॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
वे विशाल मेघ घोर शब्द करते हुए सम्पूर्ण आकाश को ढक लेते हैं और मूसलाधार वर्षा करके तीनों लोकों में फैली हुई भयंकर अग्नि को बुझा देते हैं ॥37॥
 
Those gigantic clouds making loud noises cover the entire sky and by pouring torrential rains extinguish the terrible fire that has spread across the three worlds. ॥ 37॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)