vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Apps
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 6: षष्ठ अंश
»
अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन
»
श्लोक 30
श्लोक
6.3.30
ततो दग्ध्वा जगत्सर्वं रुद्ररूपी जनार्दन:।
मुखनि:श्वासजान्मेघान्करोति मुनिसत्तम॥ ३०॥
अनुवाद
हे मुनि! तत्पश्चात् भगवान विष्णु रुद्ररूप धारण करके सम्पूर्ण जगत् को जला देते हैं और अपने मुख की श्वास से बादलों को उत्पन्न करते हैं॥30॥
Oh great sage! Thereafter, Lord Vishnu in the form of Rudra burns the entire world and creates clouds through the breath of his mouth. 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
About Us
|
Contact Us
|
Privacy Policy
|
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×