श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 3: निमेषादि काल-मान तथा नैमित्तिक प्रलयका वर्णन  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  6.3.26 
भुवर्लोकं ततस्सर्वं स्वर्लोकं च सुदारुण:।
ज्वालामालामहावर्तस्तत्रैव परिवर्तते॥ २६॥
 
 
अनुवाद
फिर वह भयंकर अग्नि पृथ्वी और स्वर्गलोक को जला डालती है और ज्वालाओं के समूह का महान परिभ्रमण वहाँ चक्कर लगाने लगता है ॥26॥
 
Then that fierce fire burns the earth and the heavenly world and the great rotation of the group of flames starts circling there. 26॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)