श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन  »  श्लोक 38
 
 
श्लोक  6.2.38 
श्रीपराशर उवाच
ततस्सम्पूज्य ते व्यासं प्रशशंसु: पुन: पुन:।
यथाऽऽगतं द्विजा जग्मुर्व्यासोक्तिकृतनिश्चया:॥ ३८॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - तत्पश्चात उसने व्यास जी की पूजा की तथा उनकी बारम्बार स्तुति की और उनके उपदेश से आश्वस्त होकर वह जहाँ से आया था, वहाँ वापस चला गया। 38.
 
Shri Parashar ji said - Thereafter he worshipped Vyasa ji and praised him repeatedly and having become convinced as per his advice, he went back to the place from where he had come. 38.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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