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vishnu 6.2.37: हे धर्म को जानने वाले ब्राह्मणों, मैंने तुमसे बिना पूछे ही तुम्हारी सारी बातें बता दीं। अब मैं और क्या करूँ?   |   vishnu अध्याय 6.2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन   ।   vishnu अंश 6: षष्ठ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन  »  श्लोक 37
 
 
श्लोक  6.2.37 
भवद्भिर्यदभिप्रेतं तदेतत्कथितं मया।
अपृष्टेनापि धर्मज्ञा: किमन्यत्क्रियतां द्विजा:॥ ३७॥
 
 
अनुवाद
हे धर्म को जानने वाले ब्राह्मणों, मैंने तुमसे बिना पूछे ही तुम्हारी सारी बातें बता दीं। अब मैं और क्या करूँ?
 
O Brahmins who know the Dharma, I have told you all what you wanted without even asking you. What else should I do now?
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)