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vishnu 6.2.36: इसीलिए मेरे मत में ये तीनों अधिक धन्य हैं, क्योंकि सत्ययुगसहित अन्य तीन युगों में भी द्विजातियों को ही धर्म पालन में महान कष्टों का सामना करना पड़ता है ॥36॥   |   vishnu अध्याय 6.2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन   ।   vishnu अंश 6: षष्ठ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन  »  श्लोक 36
 
 
श्लोक  6.2.36 
ततस्त्रितयमप्येतन्मम धन्यतरं मतम्।
धर्मसम्पादने क्लेशो द्विजातीनां कृतादिषु॥ ३६॥
 
 
अनुवाद
इसीलिए मेरे मत में ये तीनों अधिक धन्य हैं, क्योंकि सत्ययुगसहित अन्य तीन युगों में भी द्विजातियों को ही धर्म पालन में महान कष्टों का सामना करना पड़ता है ॥36॥
 
That is why in my opinion these three are more blessed, because even in the other three yugas including Satyayuga, it is the dual castes who have to face great hardships in performing the religion. 36॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)