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vishnu 6.2.33: मैंने अपनी दिव्य दृष्टि से तुम्हारा प्रश्न समझ लिया था, इसीलिए मैंने तुम्हारे संदर्भ में 'साधु-साधु' कहा था।   |   vishnu अध्याय 6.2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन   ।   vishnu अंश 6: षष्ठ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन  »  श्लोक 33
 
 
श्लोक  6.2.33 
मयैष भवतां प्रश्नो ज्ञातो दिव्येन चक्षुषा।
ततो हि व: प्रसङ्गेन साधु साध्विति भाषितम्॥ ३३॥
 
 
अनुवाद
मैंने अपनी दिव्य दृष्टि से तुम्हारा प्रश्न समझ लिया था, इसीलिए मैंने तुम्हारे संदर्भ में 'साधु-साधु' कहा था।
 
I had understood your question through my divine sight; that is why I had said, 'Sadhu-Sadhu' in your context. 33.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)