श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन  »  श्लोक 31
 
 
श्लोक  6.2.31 
ऋषयस्ते तत: प्रोचुर्यत्प्रष्टव्यं महामुने।
अस्मिन्नेव च तत् प्रश्ने यथावत्कथितं त्वया॥ ३१॥
 
 
अनुवाद
तब ऋषियों ने कहा, "हे महामुनि! हमें जो कुछ पूछना था, आपने उसका उत्तर इस प्रश्न में ठीक-ठीक दे दिया है। [अतः अब हमें और कुछ पूछने की आवश्यकता नहीं है]॥31॥
 
Then the sages said, "O great sage! Whatever we had to ask, you have answered it exactly in this question. [Therefore, now we do not have to ask anything more]॥ 31॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas