श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  6.2.27 
एवमन्यैस्तथा क्लेशै: पुरुषा द्विजसत्तमा:।
निजाञ्जयन्ति वै लोकान‍् प्राजापत्यादिकान‍्क्रमात्॥ २७॥
 
 
अनुवाद
इस प्रकार हे द्विजसत्तमो! इन तथा अन्य कठिन उपायों से मनुष्य क्रमशः प्राजापत्य आदि शुभ लोकों को प्राप्त होते हैं॥27॥
 
In this way O Dwijasattmo! Through these and other such difficult methods, men respectively attain the auspicious worlds like Prajapatya etc. 27॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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