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vishnu 6.2.23: परन्तु जो शूद्र केवल यज्ञ करने का अधिकार रखता है, वह ब्राह्मणों की सेवा करने से ही मोक्ष प्राप्त करता है; अतः वह अन्य वर्णों से अधिक धन्य है।   |   vishnu अध्याय 6.2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन   ।   vishnu अंश 6: षष्ठ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  6.2.23 
द्विजशुश्रूषयैवैष पाकयज्ञाधिकारवान्।
निजाञ्जयति वै लोकाञ्‍च्छूद्रो धन्यतरस्तत:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
परन्तु जो शूद्र केवल यज्ञ करने का अधिकार रखता है, वह ब्राह्मणों की सेवा करने से ही मोक्ष प्राप्त करता है; अतः वह अन्य वर्णों से अधिक धन्य है।
 
But the Sudra who has the right only to perform the [prayerless] sacrifice, attains salvation only by serving the Brahmins; hence he is more blessed than the other castes. 23.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)