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vishnu 6.2.21: वे सब अनुचित काम करके (नियम के विरुद्ध) पाप को प्राप्त होते हैं; यहाँ तक कि वे अपनी इच्छानुसार भोजन और पेय भी नहीं खा सकते ॥21॥   |   vishnu अध्याय 6.2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन   ।   vishnu अंश 6: षष्ठ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  6.2.21 
असम्यक्करणे दोषस्तेषां सर्वेषु वस्तुषु।
भोज्यपेयादिकं चैषां नेच्छाप्राप्तिकरं द्विजा:॥ २१॥
 
 
अनुवाद
वे सब अनुचित काम करके (नियम के विरुद्ध) पाप को प्राप्त होते हैं; यहाँ तक कि वे अपनी इच्छानुसार भोजन और पेय भी नहीं खा सकते ॥21॥
 
By doing all wrong things (against the rules) they incur sin; even they cannot enjoy food and drinks according to their wishes. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)