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वृथा कथा वृथा भोज्यं वृथेज्या च द्विजन्मनाम्।
पतनाय ततो भाव्यं तैस्तु संयमिभिस्सदा॥ २०॥
अनुवाद
इसमें भी व्यर्थ वार्तालाप, व्यर्थ भोजन और व्यर्थ यज्ञ ही उनके पतन के कारण हैं; अतः उनके लिए सदैव संयमित रहना आवश्यक है ॥20॥
In this too, useless conversations, useless meals and useless sacrifices are the causes of their downfall; therefore, it is essential for them to always remain restrained. ॥20॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥