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vishnu 6.2.19: [अब वे बताते हैं कि शूद्र क्यों श्रेष्ठ हैं।] द्विजों को पहले ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हुए वेदों का अध्ययन करना चाहिए और फिर अपने धर्मानुसार अर्जित धन से विधिपूर्वक यज्ञ करना चाहिए।॥19॥   |   vishnu अध्याय 6.2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन   ।   vishnu अंश 6: षष्ठ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन  »  श्लोक 19
 
 
श्लोक  6.2.19 
व्रतचर्यापरैर्ग्राह्या वेदा: पूर्वं द्विजातिभि:।
ततस्स्वधर्मसम्प्राप्तैर्यष्टव्यं विधिवद्धनै:॥ १९॥
 
 
अनुवाद
[अब वे बताते हैं कि शूद्र क्यों श्रेष्ठ हैं।] द्विजों को पहले ब्रह्मचर्य व्रत का पालन करते हुए वेदों का अध्ययन करना चाहिए और फिर अपने धर्मानुसार अर्जित धन से विधिपूर्वक यज्ञ करना चाहिए।॥19॥
 
[Now he explains why Shudras are superior.] The twice-born have to first study the Vedas while observing the vow of celibacy and then perform yajnas (sacrifices) as prescribed by the law using the money earned by following one's own religious principles.॥ 19॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)