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vishnu 6.2.18: हे धर्मात्मा लोगों! कलियुग में मनुष्य थोड़े से परिश्रम से ही महान धर्म को प्राप्त कर लेता है, इसीलिए मैं कलियुग से बहुत संतुष्ट हूँ॥18॥   |   vishnu अध्याय 6.2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन   ।   vishnu अंश 6: षष्ठ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  6.2.18 
धर्मोत्कर्षमतीवात्र प्राप्नोति पुरुष: कलौ।
अल्पायासेन धर्मज्ञास्तेन तुष्टोऽस्म्यहं कले:॥ १८॥
 
 
अनुवाद
हे धर्मात्मा लोगों! कलियुग में मनुष्य थोड़े से परिश्रम से ही महान धर्म को प्राप्त कर लेता है, इसीलिए मैं कलियुग से बहुत संतुष्ट हूँ॥18॥
 
O religious people! In Kaliyuga, a man can attain great religion with just a little hard work, that is why I am very satisfied with Kaliyuga. 18॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)