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vishnu 6.2.17: जो फल सत्ययुग में ध्यान, त्रेता में यज्ञ और द्वापर में भगवान का पूजन करने से प्राप्त होता है, वही कलियुग में श्री कृष्णचन्द्र का नाम जपने से प्राप्त होता है ॥17॥   |   vishnu अध्याय 6.2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन   ।   vishnu अंश 6: षष्ठ अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  6.2.17 
ध्यायन्कृते यजन्यज्ञैस्त्रेतायां द्वापरेऽर्चयन्।
यदाप्नोति तदाप्नोति कलौ संकीर्त्य केशवम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जो फल सत्ययुग में ध्यान, त्रेता में यज्ञ और द्वापर में भगवान का पूजन करने से प्राप्त होता है, वही कलियुग में श्री कृष्णचन्द्र का नाम जपने से प्राप्त होता है ॥17॥
 
The same result which is obtained by meditating in Satyayuga, Yagya in Treta and worshiping God in Dwapar, is obtained by chanting the name of Shri Krishna Chandra in Kaliyuga. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)