श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  6.2.14 
श्रीपराशर उवाच
इत्युक्तो मुनिभिर्व्यास: प्रहस्येदमथाब्रवीत्।
श्रूयतां भो मुनिश्रेष्ठा यदुक्तं साधु साध्विति॥ १४॥
 
 
अनुवाद
श्री पराशर जी बोले - जब ऋषियों ने यह प्रश्न किया, तब व्यास जी ने मुस्कुराते हुए कहा - "हे श्रेष्ठ ऋषियों! मैंने इन्हें बार-बार 'साधु-साधु' क्यों कहा, इसका कारण सुनिए।"॥14॥
 
Shri Parashar Ji said - When the sages asked this question, Vyasa smilingly said - "O great sages! Listen to the reason why I repeatedly called them 'sadhu-sadhu'".॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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