| श्री विष्णु पुराण » अंश 6: षष्ठ अंश » अध्याय 2: श्रीव्यासजीद्वारा कलियुग, शूद्र और स्त्रियोंका महत्त्व-वर्णन » श्लोक 12-13 |
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| | | | श्लोक 6.2.12-13  | कलिस्साध्विति यत्प्रोक्तं शूद्र: साध्विति योषित:।
यदाह भगवान् साधु धन्याश्चेति पुन: पुन:॥ १२॥
तत्सर्वं श्रोतुमिच्छामो न चेद् गुह्यं महामुने।
तत्कथ्यतां ततो हृत्स्थं पृच्छामस्त्वां प्रयोजनम्॥ १३॥ | | | | | | अनुवाद | | हे प्रभु! आपने स्नान करते समय बार-बार कहा था कि 'कलियुग श्रेष्ठ है, शूद्र श्रेष्ठ हैं, स्त्रियाँ साधु और धन्य हैं', तो क्या बात है? हम यह सम्पूर्ण बात सुनना चाहते हैं। हे मुनि! यदि यह गोपनीय न हो तो कृपया हमें बताएँ। हम आपसे इसके पीछे की अपनी आंतरिक शंका पूछेंगे।''॥12-13॥ | | | | O Lord! What is the matter when you said many times while taking bath that 'Kaliyug is the best, Shudras are the best, women are the saints and blessed'? We want to hear this entire matter. O great sage! If it is not confidential then please tell us. We will ask you our inner doubt behind this.''॥ 12-13॥ | | ✨ ai-generated | | |
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