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श्री विष्णु पुराण
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अंश 6: षष्ठ अंश
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अध्याय 1: कलिधर्मनिरूपण
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श्लोक 58
श्लोक
6.1.58
निस्सत्त्वानामशौचानां निर्ह्रीकाणां तथा नृणाम्।
यद्यद्दु:खाय तत्सर्वं कलिकाले भविष्यति॥ ५८॥
अनुवाद
बल, पवित्रता और शील से रहित पुरुषों को जो-जो दुःख हो सकते हैं, वे सब दुःख कलियुग में उपस्थित रहेंगे। 58.
Whatever sufferings can happen to men lacking in strength, purity and modesty, all those sufferings will be present in Kali-yuga. 58.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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