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श्री विष्णु पुराण
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अंश 6: षष्ठ अंश
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अध्याय 1: कलिधर्मनिरूपण
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श्लोक 47
श्लोक
6.1.47
प्रारम्भाश्चावसीदन्ति यदा धर्मभृतां नृणाम्।
तदानुमेयं प्राधान्यं कलेर्मैत्रेय पण्डितै:॥ ४७॥
अनुवाद
हे मैत्रेय! जब पुण्यात्मा पुरुषों के द्वारा किये गये कार्य असफल हो जाएँ, तब विद्वानों को कलियुग का प्रभुत्व समझना चाहिए। 47.
O Maitreya! When tasks undertaken by virtuous men fail, then learned people should understand the dominance of Kali Yuga. 47.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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