श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 1: कलिधर्मनिरूपण  »  श्लोक 44
 
 
श्लोक  6.1.44 
यदा यदा हि मैत्रेय हानिर्धर्मस्य लक्ष्यते।
तदा तदा कलेर्वृद्धिरनुमेया विचक्षणै:॥ ४४॥
 
 
अनुवाद
हे मैत्रेय! जब-जब धर्म की बड़ी हानि होने लगे, तभी-तब बुद्धिमान पुरुष को कलियुग की वृद्धि का अनुमान करना चाहिए ॥ 44॥
 
O Maitreya! Whenever there appears to be a great loss of Dharma, only then should a wise man estimate the growth of Kali Yuga. ॥ 44॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)