वेदादानं करिष्यन्ति वटवश्चाकृतव्रता:।
गृहस्थाश्च न होष्यन्ति न दास्यन्त्युचितान्यपि॥ ३२॥
अनुवाद
ब्रह्मचारी लोग वैदिक व्रत आदि का पालन किए बिना ही वेदों का अध्ययन करेंगे और गृहस्थ लोग न तो हवन करेंगे और न ही योग्य व्यक्तियों को उचित दान देंगे ॥32॥
The brahmacārīs will study the Vedas without observing Vedic fasts etc. and the householders will neither perform havans nor give appropriate donations to deserving people. ॥ 32॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥