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श्री विष्णु पुराण
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अंश 6: षष्ठ अंश
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अध्याय 1: कलिधर्मनिरूपण
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श्लोक 26
श्लोक
6.1.26
दुर्भिक्षमेव सततं तथा क्लेशमनीश्वरा:।
प्राप्स्यन्ति व्याहतसुखप्रमोदा मानवा: कलौ॥ २६॥
अनुवाद
कलियुग में सुख और आनन्द का नाश होने के कारण असमर्थ मनुष्य सदा अकाल और दुःख भोगेंगे ॥26॥
Due to the destruction of happiness and joy in Kaliyuga, incapable people will suffer famine and misery forever. 26॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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