श्री विष्णु पुराण  »  अंश 6: षष्ठ अंश  »  अध्याय 1: कलिधर्मनिरूपण  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  6.1.11 
विवाहा न कलौ धर्म्या न शिष्यगुरुसंस्थिति:।
न दाम्पत्यक्रमो नैव वह्निदेवात्मक: क्रम:॥ ११॥
 
 
अनुवाद
उस समय धार्मिक विवाह, गुरु-शिष्य सम्बन्ध की स्थिति, दाम्पत्य क्रम और अग्नि में आहुति देने का क्रम (अनुष्ठान) भी नहीं रहता ॥11॥
 
At that time, there is no religious marriage, status of guru-disciple relationship, conjugal order and even the sequence (ritual) of offering sacrifice to the fire. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)