vedamrit
Reset
Home
प्रमुख ग्रंथ
भगवद गीता
श्रीमद् रामायण
श्रीमद् भागवतम
श्री महाभारत
श्री रामचरितमानस
श्रीमद् विष्णु पुराण
श्रीचैतन्य भागवत
श्रीचैतन्य चरितामृत
भक्तिरसामृतसिन्धु
वैष्णव भजन, इस्कॉन आरती
Articles
Apps
About
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 9: प्रलम्ब-वध
»
श्लोक 35
श्लोक
5.9.35
मुष्टिना सोऽहनन्मूर्ध्नि कोपसंरक्तलोचन:।
तेन चास्य प्रहारेण बहिर्याते विलोचने॥ ३५॥
अनुवाद
क्रोध से लाल आंखें करके उसने उसके सिर पर मुक्का मारा, जिससे उस राक्षस की दोनों आंखें निकल आईं।
His eyes turning red with anger he punched him on the head, due to which both the eyes of that demon popped out.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2023 vedamrit.in - All Rights Reserved. Developed by ACd
Download SongBook App
Install
×