श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 9: प्रलम्ब-वध  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  5.9.28 
दिव्यं हि रूपं तव वेत्ति नान्यो
देवैरशेषैरवताररूपम्।
तदर्च्यते वेत्सि न किं यदन्ते
त्वय्येव विश्वं लयमभ्युपैति॥ २८॥
 
 
अनुवाद
आपके दिव्य स्वरूप को आपके अतिरिक्त कोई नहीं जानता, इसलिए सभी देवता आपके अवतार की ही पूजा करते हैं। क्या आप नहीं जानते कि अंत में यह सम्पूर्ण जगत आपमें ही लीन हो जाता है?॥28॥
 
No one knows your divine form except you, therefore all the gods worship your incarnation only. Do you not know that in the end this entire universe gets absorbed in you?॥ 28॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)