श्रीपराशर उवाच
तमाह रामं गोविन्द: स्मितभिन्नोष्ठसम्पुट:।
महात्मा रौहिणेयस्य बलवीर्यप्रमाणवित्॥ २२॥
अनुवाद
श्री पराशरजी बोले - तब रोहिणीनन्दन के वीर्य के बल को जानने वाले महात्मा श्रीकृष्णचन्द्र ने मधुर मुस्कान के साथ अपनी भगोष्ठियाँ खोलकर बलरामजी से कहा॥22॥
Shri Parasharji said - Then Mahatma Shri Krishnachandra, who knew the strength of Rohini Nandan's semen, opened his labia with a sweet smile and said to Balaramji. 22॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥