श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 7: कालिय-दमन  »  श्लोक 77
 
 
श्लोक  5.7.77 
श्रीभगवानुवाच
नात्र स्थेयं त्वया सर्प कदाचिद्यमुनाजले।
सपुत्रपरिवारस्त्वं समुद्रसलिलं व्रज॥ ७७॥
 
 
अनुवाद
श्री भगवान बोले - हे सर्प! अब तुम्हें इस यमुना जल में नहीं रहना चाहिए। तुम शीघ्र ही अपने पुत्र और परिवार सहित समुद्र के जल में चले जाओ।
 
Sri Bhagavan said - O serpent! Now you should not stay in this Yamuna water. You should quickly go to the ocean water along with your son and family. 77.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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