श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 7: कालिय-दमन  »  श्लोक 65
 
 
श्लोक  5.7.65 
सदसद्रूपिणो यस्य ब्रह्माद्यास्त्रिदशेश्वरा:।
परमार्थं न जानन्ति तस्य स्तोष्यामि किन्न्वहम्॥ ६५॥
 
 
अनुवाद
जिनके वास्तविक ससत् (कारण) स्वरूप को ब्रह्मा आदि देवता भी नहीं जानते, मैं आपकी स्तुति कैसे कर सकूँगा? 65॥
 
How will I be able to praise you, whose true form of Sasat (causal) form is not known even to gods like Brahma etc.? 65॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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