श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 7: कालिय-दमन  »  श्लोक 49
 
 
श्लोक  5.7.49 
न समर्था: सुरास्स्तोतुं यमनन्यभवं विभुम्।
स्वरूपवर्णनं तस्य कथं योषित्करिष्यति॥ ४९॥
 
 
अनुवाद
हम स्त्रियाँ आपके उस स्वयंभू और सर्वव्यापक प्रभु का वर्णन कैसे कर सकती हैं, जिनकी स्तुति करने में देवता भी समर्थ नहीं हैं ॥ 49॥
 
How can we women describe Your form, that self-existent and all-pervasive Lord, whom even the gods are not capable of praising? ॥ 49॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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