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vishnu 5.6.48: कभी तुम दोनों दूसरे ग्वालों के गीतों की प्रशंसा करते और कभी ग्वालों की तरह बांसुरी बजाते हुए मोर की आवाज की नकल करते ॥48॥   |   vishnu अध्याय 5.6: शकटभंजन, यमलार्जुन-उद्धार, व्रजवासियोंका गोकुलसे वृन्दावनमें जाना और वर्षा-वर्णन   ।   vishnu अंश 5: पंचम अंश   ।   श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 6: शकटभंजन, यमलार्जुन-उद्धार, व्रजवासियोंका गोकुलसे वृन्दावनमें जाना और वर्षा-वर्णन  »  श्लोक 48
 
 
श्लोक  5.6.48 
गायतामन्यगोपानां प्रशंसापरमौ क्वचित्।
मयूरकेकानुगतौ गोपवेणुप्रवादकौ॥ ४८॥
 
 
अनुवाद
कभी तुम दोनों दूसरे ग्वालों के गीतों की प्रशंसा करते और कभी ग्वालों की तरह बांसुरी बजाते हुए मोर की आवाज की नकल करते ॥48॥
 
Sometimes you both would praise the songs of the other cowherds and at other times you would imitate the call of the peacock while playing the flute like the cowherds. ॥ 48॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)