Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 vishnu 5.6.39: जैसे मूर्ख मनुष्यों के निर्लज्ज वचनों से अच्छे वक्ता के वचन भी कलंकित हो जाते हैं, वैसे ही निर्मल चन्द्रमा भी मलिन बादलों से आवृत होने के कारण अनाकर्षक हो गया ॥39॥ | vishnu अध्याय 5.6: शकटभंजन, यमलार्जुन-उद्धार, व्रजवासियोंका गोकुलसे वृन्दावनमें जाना और वर्षा-वर्णन । vishnu अंश 5: पंचम अंश । श्री विष्णु पुराण Sri Vishnu Puran | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न रेजेऽन्तरितश्चन्द्रो निर्मलो मलिनैर्घनै:।
सद्वादिवादो मूर्खाणां प्रगल्भाभिरिवोक्तिभि:॥ ३९॥
अनुवाद
जैसे मूर्ख मनुष्यों के निर्लज्ज वचनों से अच्छे वक्ता के वचन भी कलंकित हो जाते हैं, वैसे ही निर्मल चन्द्रमा भी मलिन बादलों से आवृत होने के कारण अनाकर्षक हो गया ॥39॥
Just as the words of a good speaker become polluted by the impudent utterances of foolish people, similarly the clear Moon also became unattractive due to being covered by dirty clouds. ॥ 39॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥