vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री विष्णु पुराण
»
अंश 5: पंचम अंश
»
अध्याय 6: शकटभंजन, यमलार्जुन-उद्धार, व्रजवासियोंका गोकुलसे वृन्दावनमें जाना और वर्षा-वर्णन
»
श्लोक 34
श्लोक
5.6.34
क्वचिद्वहन्तावन्योन्यं क्रीडमानौ तथा परै:।
गोपपुत्रैस्समं वत्सांश्चारयन्तौ विचेरतु:॥ ३४॥
अनुवाद
कभी एक-दूसरे को पीठ पर उठाकर, कभी दूसरे ग्वालबालों के साथ खेलते हुए, बछड़ों को चराते हुए वे साथ-साथ घूमते थे ॥34॥
Sometimes carrying each other on their backs, sometimes playing with other cowherd boys, they would roam around together, grazing the calves. ॥ 34॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas