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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 4: वसुदेव-देवकीका कारागारसे मोक्ष
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श्लोक 8
श्लोक
5.4.8
किमुर्व्यामवनीपाला मद्बाहुबलभीरव:।
न सर्वे सन्नतिं याता जरासन्धमृते गुरुम्॥ ८॥
अनुवाद
क्या हमारे गुरु (ससुर) जरासंध को छोड़कर पृथ्वी के सभी लोग मेरे पराक्रम से भयभीत होकर मेरे सामने अपना सिर नहीं झुकाते? 8॥
Do all the people of the earth, except our Guru (father-in-law) Jarasandha, do not bow their heads before me in fear of my might? 8॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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