श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 4: वसुदेव-देवकीका कारागारसे मोक्ष  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  5.4.3 
मां हन्तुममरैर्यत्न: कृत: किल दुरात्मभि:।
मद्वीर्यतापितान्वीरो न त्वेतान्गणयाम्यहम्॥ ३॥
 
 
अनुवाद
यह बात तो सर्वविदित हो रही है कि दुष्टात्मा देवताओं ने मुझे मारने का प्रयत्न किया है; परंतु मैं वीर होने के कारण अपने वीर्य से पीड़ित इन लोगों को कुछ भी नहीं समझता। ॥3॥
 
It is becoming well known that the evil-spirited gods have made some effort to kill me; but I, being a brave man, do not consider these people tormented by my semen as anything. ॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)