श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 4: वसुदेव-देवकीका कारागारसे मोक्ष  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  5.4.2 
कंस उवाच
हे प्रलम्ब महाबाहो केशिन् धेनुक पूतने।
अरिष्टाद्यास्तथैवान्ये श्रूयतां वचनं मम॥ २॥
 
 
अनुवाद
कंस ने कहा- हे प्रलंब! हे महाबाहु केशिन! हे धेनुक! हे पुताने! तथा हे अरिष्ट तथा अन्य राक्षसों! मेरी बात सुनो-॥2॥
 
Kamsa said- O Pralamba! O mighty-armed Keshin! O Dhenuk! O Putane! And O Arishta and other demons! Listen to my words-॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)