श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 4: वसुदेव-देवकीका कारागारसे मोक्ष  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  5.4.10 
तथापि खलु दुष्टानां तेषामप्यधिकं मया।
अपकाराय दैत्येन्द्रा यतनीयं दुरात्मनाम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
तथापि हे दैत्येन्द्रो! मुझे उन दुष्टों और दुष्टात्माओं को कष्ट पहुँचाने के लिए और भी अधिक प्रयत्न करना चाहिए ॥10॥
 
However O Daityendro! I should try even harder to cause harm to those wicked and evil spirits. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)