श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 91
 
 
श्लोक  5.38.91 
इत्युक्तोऽभ्येत्य पार्थाभ्यां यमाभ्यां च सहार्जुन:।
दृष्टं चैवानुभूतं च सर्वमाख्यातवांस्तथा॥ ९१॥
 
 
अनुवाद
महर्षि व्यासजी से यह बात सुनकर अर्जुन इन्द्रप्रस्थ आए और उन्होंने जो कुछ देखा और सुना था, वह सब पृथापुत्रों (युधिष्ठिर और भीमसेन) तथा यमपुत्रों (नकुल और सहदेव) से ठीक उसी प्रकार कह सुनाया॥ 91॥
 
Upon hearing this from the sage Vyasa, Arjuna came to Indraprastha and narrated to the sons of Pritha (Yudhishthira and Bhimasena) and the sons of Yama (Nakula and Sahadeva) whatever he had seen and heard in exactly the same manner.॥ 91॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)