श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 86
 
 
श्लोक  5.38.86 
भवतां चोपसंहार आसन्नस्तेन पाण्डव।
बलं तेजस्तथा वीर्यं माहात्म्यं चोपसंहृतम्॥ ८६॥
 
 
अनुवाद
और अब तुम्हारा अन्त भी निकट है; इसलिये सर्वशक्तिमान ने तुम्हारे बल, तेज, साहस और महानता को क्षीण कर दिया है।
 
And your end is also near now; therefore the Almighty has diminished your strength, brilliance, courage and greatness. 86.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)