श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 85
 
 
श्लोक  5.38.85 
तत्त्वया नात्र कर्त्तव्यश्शोकोऽल्पोऽपि हि पाण्डव।
तेनैवाखिलनाथेन सर्वं तदुपसंहृतम्॥ ८५॥
 
 
अनुवाद
हे पाण्डव! इस विषय में तुम्हें तनिक भी शोक नहीं करना चाहिए, क्योंकि अखिलेश्वर ने ही सम्पूर्ण यदुवंश का नाश किया है।
 
O Pandava, you should not grieve at all on this matter, because it is Akhileshwar who has destroyed the entire Yaduvansh. 85.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)