श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 83
 
 
श्लोक  5.38.83 
श्रीव्यास उवाच
इत्युदीरितमाकर्ण्य मुनिस्ताभि: प्रसादित:।
पुनस्सुरेन्द्र्रलोकं वै प्राह भूयो गमिष्यथ॥ ८३॥
 
 
अनुवाद
श्रीव्यासजी बोले - मुनिके, यह वचन सुनकर अप्सराएँ पुनः उन्हें प्रसन्न करने लगीं, तब ऋषि ने उनसे कहा - "इसके बाद तुम पुनः स्वर्ग में जाओगी।" ॥83॥
 
Sri Vyasji said - Munika, on hearing these words the Apsaras again pleased him, then the sage said to them, "After that you will again go to heaven." ॥ 83॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)