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श्री विष्णु पुराण
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अंश 5: पंचम अंश
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अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण
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श्लोक 77
श्लोक
5.38.77
रम्भातिलोत्तमाद्यास्तंवैदिक्योऽप्सरसोऽब्रुवन्।
प्रसन्ने त्वय्यपर्याप्तं किमस्माकमिति द्विज॥ ७७॥
अनुवाद
तब रम्भा और तिलोत्तमा आदि वैदिक (वैदिक) अप्सराएँ उससे बोलीं - "हे ब्राह्मण! आपके प्रसन्न होने पर हमें क्या नहीं मिला? 77.
Then the Vedic (Vedic) Apsaras like Rambha and Tilottama said to him - "O Brahmin! What did we not get after you became pleased? 77.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
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हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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