श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 72-73
 
 
श्लोक  5.38.72-73 
जितेष्वसुरसङ्घेषु मेरुपृष्ठे महोत्सव:।
बभूव तत्र गच्छन्त्यो ददृशुस्तं सुरस्त्रिय:॥ ७२॥
रम्भातिलोत्तमाद्यास्तु शतशोऽथ सहस्रश:।
तुष्टुवुस्तं महात्मानं प्रशशंसुश्च पाण्डव॥ ७३॥
 
 
अनुवाद
उस समय देवताओं ने दैत्यों पर विजय प्राप्त करके सुमेरु पर्वत पर एक बड़ा उत्सव मनाया। उसमें सम्मिलित होने के लिए रम्भा और तिलोत्तमा आदि सैकड़ों-हजारों देव-अप्सराएँ मार्ग में ऋषि को देखकर उनकी बहुत स्तुति करने लगीं।
 
At that time, after having conquered the demons, the gods organized a grand celebration on Mount Sumeru. Going to participate in it, hundreds and thousands of celestial nymphs like Rambha and Tilottama saw the sage on the way and praised him immensely. 72-73.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)