श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 71
 
 
श्लोक  5.38.71 
अष्टावक्र: पुरा विप्रो जलवासरतोऽभवत्।
बहून्वर्षगणान्पार्थ गृणन्ब्रह्म सनातनम्॥ ७१॥
 
 
अनुवाद
प्राचीन काल में एक बार विप्रवर अष्टावक्रजी सनातन ब्रह्मा की स्तुति करते हुए कई वर्षों तक जल में रहे। 71॥
 
Once in ancient times, Vipravar Ashtavakraji remained in water for many years praising Sanatan Brahma. 71॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)