श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 66
 
 
श्लोक  5.38.66 
स देवेशश्शरीराणि समाविश्य जगत्स्थितिम्।
करोति सर्वभूतानां नाशमन्ते जगत्पति:॥ ६६॥
 
 
अनुवाद
जगत् के स्वामी देवेश्वर ही शरीरों में प्रवेश करके जगत् की स्थिति स्थापित करते हैं और अन्त में सम्पूर्ण प्राणियों का संहार भी वही करते हैं ॥66॥
 
It is the Lord of the Universe, Deveshwar, who enters into the bodies and establishes the state of the world and in the end, it is He who destroys all the living beings. 66॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)