श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 62
 
 
श्लोक  5.38.62 
अतो गतस्स भगवान्कृतकृत्यो यथेच्छया।
सृष्टिं सर्गे करोत्येष देवदेव: स्थितौ स्थितिम्।
अन्तेऽन्ताय समर्थोऽयं साम्प्रतं वै यथा गत:॥ ६२॥
 
 
अनुवाद
अतः भगवान् अपना कार्य पूरा करके अपनी इच्छानुसार चले गए। ये भगवान् सृष्टि के आदि में जगत् की रचना करते हैं, परिस्थिति के समय उसका पालन करते हैं और अन्त में उसका संहार करने में समर्थ हैं - जैसे इस समय वे [राक्षसों आदि का संहार करके] चले गए हैं। 62॥
 
Therefore, after completing His work, God went away as per his wish. This God creates the world in the beginning of the universe, maintains it at the time of the situation and in the end, He is capable of destroying it - just like at this time He has gone away [after killing the demons etc.]. 62॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)