श्री विष्णु पुराण  »  अंश 5: पंचम अंश  »  अध्याय 38: यादवोंका अन्त्येष्टि-संस्कार, परीक्षित् का राज्याभिषेक तथा पाण्डवोंका स्वर्गारोहण  »  श्लोक 61
 
 
श्लोक  5.38.61 
वृष्ण्यन्धककुलं सर्वं तथा पार्थोपसंहृतम्।
न किञ्चिदन्यत्कर्तव्यं तस्य भूमितले प्रभो:॥ ६१॥
 
 
अनुवाद
हे पार्थ! वृष्णि और अंधक सहित सम्पूर्ण यदुवंश भी नष्ट हो गया है; अतः पृथ्वी पर भगवान् का अब कोई कर्तव्य नहीं रह गया है ॥ 61॥
 
O Partha! The entire Yadu clan including Vrishni and Andhaka have also been destroyed; therefore there is no more duty left for the Lord on earth. ॥ 61॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)