वृष्ण्यन्धककुलं सर्वं तथा पार्थोपसंहृतम्।
न किञ्चिदन्यत्कर्तव्यं तस्य भूमितले प्रभो:॥ ६१॥
अनुवाद
हे पार्थ! वृष्णि और अंधक सहित सम्पूर्ण यदुवंश भी नष्ट हो गया है; अतः पृथ्वी पर भगवान् का अब कोई कर्तव्य नहीं रह गया है ॥ 61॥
O Partha! The entire Yadu clan including Vrishni and Andhaka have also been destroyed; therefore there is no more duty left for the Lord on earth. ॥ 61॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)